- बसंत पंचमी पर वासंती रंग में रंगेगा महाकाल मंदिर, भस्म आरती से होगी शुरुआत; सांदीपनि आश्रम में भी होंगे विशेष धार्मिक आयोजन!
- वीरभद्र जी के कान में स्वस्ति वाचन के बाद ली गई आज्ञा, पंचामृत अभिषेक और भस्म अर्पण के साथ साकार रूप में भगवान ने दिए दर्शन
- महाकाल दरबार पहुंचे सुनील शेट्टी, परिवार के साथ शांत माहौल में किए दर्शन; Border-2 की सफलता के लिए मांगा आशीर्वाद
- सभा मंडप से गर्भगृह तक अनुष्ठानों की श्रृंखला, भस्म अर्पण के बाद साकार रूप में हुए महाकाल के दर्शन; जल और पंचामृत से अभिषेक, रजत मुकुट और शेषनाग श्रृंगार के साथ खुले मंदिर के पट
- महाकाल की भस्म आरती में शामिल हुए अभिनेता मेका श्रीकांत, नंदी हॉल में बैठकर किया जाप
इस बार विवाह मुहूर्त कम, पाती के लग्न लिखवाने को संपर्क कर रहे श्रद्धालु
उज्जैन। चिंतामन गणेश के मंदिर में 13 दिसंबर को अगहन शुक्ल प्रतिपदा से पाती के लग्न लिखे जाएंगे। इस बार विवाह मुहूर्त कम होने से देशभर से लोग पाती के लग्न लिखवाने के लिए मंदिर में संपर्क कर रहे हैं। मंदिर में पुजारी परिवार वंश परंपरा से पाती के लग्न लिखते हैं। पं.शंकर पुजारी ने बताया देवप्रबोधिनी एकादशी के बाद शुभ मांगलिक कार्यों की शुरुआत हो गई है।
जिन परिवारों में विवाह के आयोजन होना है, वे युवक-युवतियों की जन्म पत्रिका के अनुसार मुहूर्त निकलवा रहे हैं। कई बार ज्योतिष गणना के अनुसार युवक-युवतियों के विवाह मुहूर्त नहीं निकलते हैं लेकिन परिवार के लोग विवाह करना चाहते हैं। कई बार ऐसा होता है कि युवक-युवती अपने जन्म दिन या किसी खास तारीख पर विवाह करना चाहते हैं।
ऐसे लोगों के लिए पाती के लग्न लिखने की परंपरा है। इसमें किसी भी प्रकार के मुहूर्त की आवश्यकता नहीं है। उज्जैन में भगवान चिंतामन गणेश को अधिष्ठात्र मानकर लड़की के परिवार की ओर से लड़के के परिवारवालों को विवाह के लिए पाती लिख दी जाती है। यजमान जिस तारीख को विवाह करना चाहते हैं, उस दिन की पाती लिखकर भगवान चिंतामन गणेश के चरणों में रखकर यजमान को सौंप देते हैं। भगवान भक्तों के कारज सिद्ध कराते हैं।
युवाओं में बढ़ा क्रेज, शुक्ल पक्ष में लिखी जाती है पाती अपने विवाह को यादगार बनाने के लिए किसी खास तारीख पर शादी करने का चलन बढ़ गया है। आधुनिक सोच वाले युवा मुहूर्त से ज्यादा अपनी पसंद की तारीख को महत्व दे रहे हैं।